Shahzad Ahmad & Associates
Tax Consultant, Litigation & Compliance Expert, Tax Dispute, Corporate Consulting, Legal Drafting, Business Consulting Service's
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12/05/2026
GST रिफंड फाइलिंग प्रक्रिया में बड़े बदलाव
सरकार ने जीएसटी पोर्टल पर रिफंड क्लेम करने की प्रक्रिया को अब पहले से अधिक सख्त और डेटा-संचालित (Data-driven) बना दिया है। इसका मुख्य प्रभाव एक्सपोर्टर्स और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले बिजनेस पर पड़ेगा।
1. मुख्य बदलाव: अधिक विस्तृत जानकारी (Detailed Reporting)
अब केवल कुल रिफंड अमाउंट बताना काफी नहीं होगा। टैक्सपेयर्स को हर इनवॉइस (Invoice) के लिए निम्नलिखित विस्तृत जानकारी देनी होगी:
इनवर्ड सप्लाई की प्रकृति (Nature of supply)।
डॉक्यूमेंट का प्रकार।
कुल क्लेम किया गया ITC (Input Tax Credit)।
सेक्शन 17(5) के तहत ब्लॉक क्रेडिट का हिस्सा।
एलिजिबल (Eligible) और इन-एलिजिबल (Ineligible) ITC का अलग-अलग विवरण।
2. नई 'एनेक्सर-बी' (Annexure-B) और JSON फॉर्मेट
टैक्सपेयर्स को अब एनेक्सर-बी ऑफलाइन यूटिलिटी के जरिए तैयार करना होगा।
इस डेटा को JSON फॉर्मेट में बनाकर फॉर्म GST RFD-01 के साथ पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है।
3. ऑटोमेशन और सिस्टम वेरिफिकेशन
इस बदलाव का उद्देश्य रिफंड प्रक्रिया को ऑटोमेटेड बनाना है ताकि टैक्स अधिकारियों की मैन्युअल जांच पर निर्भरता कम हो सके।
जीएसटी सिस्टम अब खुद इनवॉइस और ITC डिटेल्स को वेरीफाई करेगा।
अब यह भी बताना होगा कि संबंधित इनवॉइस किस GSTR-2B पीरियड में दिख रहा है।
4. तकनीक का प्रभाव
रियल-टाइम वेरिफिकेशन: तकनीक के जरिए डेटा की तुरंत जांच होगी।
सिस्टम वैलिडेशन: अब केवल डेटा भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर लाइन आइटम को सिस्टम के नियमों के अनुसार सही साबित करना होगा।
सारांश: सरकार का यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और गलत रिफंड दावों को रोकने के लिए है। अब व्यापारियों को अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट का हिसाब बहुत बारीकी से देना होगा।
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