06/08/2026
कठिन और सरल
क्या सरल है और क्या कठिन,यह जानना कठिन भी है,और सरल भी।किसी के लिए जो सरल है, किसी दूसरे के लिए वही कठिन है।
कोई कठिन को सरल बना लेता है,तो कोई सरल को कठिन। कोई कठिन को बड़ी सरलता से समझ लेता है,तो किसी को सरल को समझने में बड़ी कठनाई होती है।
सरल जीवन जीने के लिए कठिन तप करना पड़ता है।सरलता भरा जीवन जीना हर इंसान के बस में नहीं,बहुत से लोग यह समझने की भूल कर बैठते हैं कि वे सरल जीवन जी रहे हैं,जबकि सरल जीवन जीना वाकई में उनके बस की बात ही नहीं होती,और वो भ्रम में जी रहे होते हैं कि वो बहुत सरल जीवन जी रहें हैं ।
आप कौन सा जीवन जी रहे हैं क्या आप जानते हैं?
आप सब की टिप्पड़ी चाहिए,जो भी लिखें,पर लिखें ज़रूर। धन्यवाद ।
K C Sir
21/01/2025
I have reached 100 followers! Thank you for your continued support. I could not have done it without each of you. 🙏🤗🎉
14/01/2023
सोने चाँदी के थोक व्यापारियों हेतु
सूचना
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10/10/2022
10ऑक्टोबर 2016 को लिखी हुई एक छोटी सी कविता,आज सामने आ गयी,जिसे आपके समक्ष फिर से प्रस्तुत कर रहे हैं।
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=680987828724688&id=463831093773697
14/09/2022
हिन्दी दिवस की आपसब को बहुत बहुत बधाइयाँ।
आज इस शुभअवसर पर हमको आपसे कुछ कहना है।
आजका एक दिन हिन्दी दिवस के रूप में मनाकर क्या हम हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य को निभा देते हैं?
क्या हमने कभी सोचा है कि जिस हिंदुस्तान की मिट्टी ने हमको जन्म दिया उसके प्रति हमारे बस इतना करने से ऋण उतर जायेगा?
क्या हमने इस बात पर ध्यान दिया है कि बीसवीं सदी के हिंदुस्तान के बच्चे एवम उनके माता-पिता,हिंदी सीखने,पढ़ने और बोलने में शर्मिन्दगी का अहसास करते हैं।अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों से पढ़ने वाले बच्चे एवं उनके माता-पिता हिन्दी की पढ़ाई से कब दूर होते चले गये ये उनको पता ही नहीं चल पाया।करीब एक पीढ़ी अर्थात 25-30 वर्ष बीत जाने के बाद अब बहुत से भारतीयों को ऎसा लग रहा है कि कुछ गलत हो गया है,परन्तु बहुतों को अभी भी कोई अहसास नहीं है कि हमसे क्या छूट गया है या हम कितनी बड़ी समस्या से रूबरू हो चुके हैं,और वो है,अपनी हिंदुस्तानी भाषा हिन्दी के प्रति विमुख होना।आज 2-4 वर्ष के बच्चे से लेकर 20-30 वर्ष के युवाओं को ठीक से हिन्दी बोलनी नहीं आती,पढ़ने की बात तो दूर की है।आज अंग्रेजी के प्रेम ने हमको हिन्दी से कितना दूर कर दिया है,ये सोचने और समझने की बात है।
क्या हमारे आज के माता-पिता और आज की पीढ़ी के बच्चे इस बात का संज्ञान लेंगें कि अंग्रेजी की इस अन्धी दौड़ में हम अपनी हिन्दी से कितनी दूर निकल आये हैं?
क्या हमको इस बात से शर्मिंदगी नहीं होती कि हिंदुस्तानी होने के बावजूद हम हिन्दी नहीं लिख-बोल पा रहे हैं?हम हिन्दी जैसी परिपक्व भाषा को छोड़कर दूसरी अपरिपक्व भाषा को सीखने में अपने को उलझाये हुए हैं,जबकि हिन्दी से अधिक समग्रता अंग्रेजी भाषा में नहीं है।
हमारी भाषा में 13 स्वर हैं और अंग्रेजी भाषा में सिर्फ 5 स्वर।
हमारी भाषा में 36 व्यंजन हैं और अंग्रेजी में सिर्फ 21व्यंजन।
साफ दिखाई पड़ता है कि अंग्रेजी भाषा हिन्दी के समकक्ष बहुत दूर-दूर तक खड़ी नहीं रह सकती है।
इसलिये आप सब से मेरा अनुरोध है कि हिन्दी भाषा के प्रति अपने प्रेम को दुबारा उत्पन्न करें,स्वयम भी हिन्दी मे लिखना एवम बोलना शुरू करें और अपने बच्चों को भी हिन्दी सिखाने और बोलने सहायक बनें।
जो सज्जन व्हाट्सएप पर टूटी फूटी( अंग्रेजी में हिन्दी )लिखने की वजह से अकसर अर्थ का अनर्थ कर देते हैं,उनसे भी मेरा अनुरोध है कि वे भी अब हिन्दी का ही उपयोग करें और व्हाट्सअप्प पर अपने मन के उदगारों को सही रूप में व्यक्त करें।
इस कार्य में हम आपकी सहायता करने को हमेशा तैयार हैं,जो भी सज्जन जानना चाहते हैं कि आप कैसे व्हाट्सएप पर abcd टाइप करते हुए हिन्दी लिख सकते हैं,तो हमसे सम्पर्क करें।
आशा है आप आगे से हिन्दी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाने की कोशिशें तेज कर देंगें।
एक बार फिर हिन्दी-दिवस की बधाइयाँ एवम शुभकामनायें।