Vivek Tiwari & Co.

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Vivek Tiwari & Company
Led by CS Vivek Tiwari
Income Tax • GST • Accounting • Appeals
Company Secretary & Compliance Services
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| Est. 2002

Vivek Tiwari & Co is your trusted partner in navigating the intricate landscape of business services. We specialize in providing comprehensive solutions to meet all your business needs, ranging from company registration and GST registration to annual compliance, GST filing, trademark registration, ITR filing, and many accounting services.

💼 Our Services:
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24/08/2026

केवल HUF बनाना और PAN लेना काफी नहीं है। असली सवाल है, HUF में कैपिटल आएगी कहां से?

पैतृक या संयुक्त पारिवारिक संपत्ति HUF का कॉर्पस बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है। लेकिन दादा या परदादा से मिली हर संपत्ति अपने-आप HUF की संपत्ति नहीं बनती। इसके लिए विरासत के दस्तावेज और संपत्ति की कानूनी स्थिति जांचना जरूरी है।

ध्यान रखें: अपनी व्यक्तिगत संपत्ति HUF में ट्रांसफर करने पर उससे होने वाली आय आपके हाथों में क्लब हो सकती है।

अगले भाग में जानेंगे कि क्या गिफ्ट से HUF का कॉर्पस बनाया जा सकता है। ऐसी उपयोगी जानकारी के लिए पेज को फॉलो करें।

सोसाइटी रजिस्ट्रेशन, अनुपालन (Compliance), संशोधन (Amendments) तथा विधिक मार्गदर्शन के लिए पेशेवर सहायता हेतु Vivek Tiwari & Co. से संपर्क करें।
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24/08/2026

HUF तो बना ली, लेकिन उसके अंदर Corpus यानी Capital कैसे बनेगा? 🏠👨‍👩‍👧‍👦

HUF की आर्थिक गतिविधियाँ शुरू करने के लिए उसके पास वैध Corpus या Property होना आवश्यक है। कुछ परिस्थितियों में पैतृक अथवा coparcenary character वाली संपत्ति HUF Corpus का हिस्सा बन सकती है।

ऐसी संपत्ति:

✅ परिवार की सामूहिक संपत्ति के रूप में रखी जा सकती है
✅ उससे प्राप्त किराया या अन्य आय HUF की आय हो सकती है
✅ समय के साथ HUF की आर्थिक शक्ति बढ़ा सकती है
✅ पात्र coparceners के संयुक्त हित से संबंधित हो सकती है

लेकिन एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है:

दादा या परदादा से inheritance में मिली प्रत्येक संपत्ति स्वतः HUF property नहीं बनती। संपत्ति HUF की है या किसी व्यक्ति की self-acquired/individual property, इसका निर्धारण इन बातों से होगा:

• संपत्ति पहले किसके नाम और किस स्वरूप में थी
• उत्तराधिकार कब और किस provision के अंतर्गत हुआ
• क्या वह पहले से coparcenary property थी
• Will, partition या family settlement में क्या लिखा है
• Revenue और ownership records क्या बताते हैं

इसी तरह किसी individual द्वारा अपनी property को HUF में transfer कर देने से tax consequences समाप्त नहीं होते। ऐसी property से होने वाली income पर Section 64(2) के clubbing provisions लागू हो सकते हैं।

इसलिए HUF Corpus बनाते समय property title, succession documents, family tree, Will, gift deed तथा tax implications की पेशेवर जाँच कराना जरूरी है।

अगले भाग में जानेंगे: Gift के माध्यम से HUF Corpus कैसे बनाया जा सकता है और उससे जुड़े tax rules क्या हैं।

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24/08/2026

क्या HUF बनाकर कानूनी तरीके से Tax Planning की जा सकती है? 👨‍👩‍👧‍👦💰

Hindu Undivided Family यानी HUF को Income Tax Law के अंतर्गत एक अलग taxable person माना जाता है। HUF का अपना PAN, अलग बैंक खाता और अलग Income Tax Return हो सकता है।

लेकिन केवल HUF Deed बनवाने, PAN लेने या बैंक खाता खोलने से tax saving शुरू नहीं हो जाती। इसके लिए यह आवश्यक है कि:

✅ HUF के पास वैध Corpus या Capital हो
✅ आय और संपत्ति वास्तव में HUF की हो
✅ HUF और व्यक्तिगत लेन-देन अलग रखे जाएँ
✅ अलग बैंक खाता और accounting records बनाए जाएँ
✅ किसी सदस्य की व्यक्तिगत आय को गलत तरीके से HUF की आय न दिखाया जाए
✅ Property transfer और clubbing provisions का ध्यान रखा जाए

HUF का उपयोग पैतृक संपत्ति, पारिवारिक निवेश और योग्य पारिवारिक व्यवसाय की आय को व्यवस्थित करने के लिए किया जा सकता है। लेकिन HUF की eligibility, corpus और tax treatment प्रत्येक परिवार के तथ्यों पर निर्भर करती है।

इसलिए HUF बनाने से पहले केवल संभावित tax saving नहीं, बल्कि उसके कानूनी गठन, सदस्यों, coparceners, corpus और income source की भी जाँच करानी चाहिए।

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20/08/2026

पैसों की कमी को अपने बिज़नेस का सपना रोकने मत दीजिए!

CGTMSE योजना के तहत पात्र सूक्ष्म एवं लघु उद्यम बैंक से बिना अतिरिक्त कोलेटरल के बिज़नेस लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से पहले उद्यम रजिस्ट्रेशन, जरूरी लाइसेंस और मजबूत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार रखें।

योजना की पात्रता और शर्तें अपने बैंक से अवश्य जाँचें। पूरी जानकारी के लिए वीडियो देखें और विशेषज्ञ से संपर्क करें।



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19/08/2026

सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराना काफी नहीं है!

मध्य प्रदेश में सोसाइटी बनाने के लिए न्यूनतम 7 सदस्य, सही मेमोरेंडम, नियमावली और जरूरी दस्तावेज चाहिए। रजिस्ट्रेशन के बाद सदस्य रजिस्टर, खातों, वार्षिक फाइलिंग और ऑडिट का नियमित अनुपालन भी आवश्यक है।

वीडियो देखें और सोसाइटी संचालन की जरूरी कानूनी बातें केवल 90 सेकंड में समझें। उपयोगी लगे तो इसे शेयर और सेव जरूर करें।

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19/08/2026

सोसाइटी रजिस्ट्रेशन में सही नाम, सात सदस्यों की सटीक जानकारी और पूरे दस्तावेज सबसे जरूरी हैं। आवेदन से पहले आधार विवरण मिलाएं, नाम की उपलब्धता जांचें और सभी दस्तावेजों की चेकलिस्ट तैयार रखें।

पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में समझने के लिए वीडियो देखें और उपयोगी लगे तो शेयर करें।

**कैप्शन:**
सही डेटा और सही तैयारी से सोसाइटी रजिस्ट्रेशन आसान बनाएं। छोटी गलती से बचें, आवेदन से पहले हर विवरण जांचें!



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18/08/2026

सोसाइटी का पैसा गायब है तो इसे केवल हिसाब-किताब की गलती समझकर नजरअंदाज मत कीजिए।

मेंटेनेंस फंड का बेईमानी से निजी इस्तेमाल “आपराधिक न्यासभंग” हो सकता है। BNS की धारा 316 के तहत सामान्य मामले में अधिकतम 5 वर्ष की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

क्या करें? बैंक स्टेटमेंट, रसीदें, ऑडिट रिपोर्ट और मीटिंग रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। केवल आरोप नहीं, ठोस प्रमाण जरूरी हैं।

पोस्ट उपयोगी लगे तो शेयर करें और कानूनी जानकारी के लिए हमें फॉलो करें।

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14/08/2026

एक छोटी-सी कानूनी चूक ट्रस्टी को अपनी जेब से जुर्माना भरने पर मजबूर कर सकती है!

महाराष्ट्र में पब्लिक ट्रस्ट को इनकम टैक्स कानून के साथ Bombay Public Trusts Act, 1950 का पालन भी करना जरूरी है। महा चैरिटी पोर्टल पर वार्षिक लेखे और ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा करें। साथ ही, ट्रस्ट की संपत्ति बेचने या लंबे समय के लिए लीज पर देने से पहले चैरिटी कमिश्नर की अनुमति जरूर लें।

अपने ट्रस्ट का अनुपालन समय रहते जाँचें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।



महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट, Bombay Public Trusts Act 1950, ट्रस्ट अनुपालन, महा चैरिटी पोर्टल, चैरिटी कमिश्नर अनुमति

14/08/2026

एक छोटी-सी कानूनी चूक ट्रस्टी को अपनी जेब से जुर्माना भरने पर मजबूर कर सकती है!

महाराष्ट्र में पब्लिक ट्रस्ट को इनकम टैक्स कानून के साथ Bombay Public Trusts Act, 1950 का पालन भी करना जरूरी है। महा चैरिटी पोर्टल पर वार्षिक लेखे और ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा करें। साथ ही, ट्रस्ट की संपत्ति बेचने या लंबे समय के लिए लीज पर देने से पहले चैरिटी कमिश्नर की अनुमति जरूर लें।

अपने ट्रस्ट का अनुपालन समय रहते जाँचें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।



महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट, Bombay Public Trusts Act 1950, ट्रस्ट अनुपालन, महा चैरिटी पोर्टल, चैरिटी कमिश्नर अनुमति

14/08/2026

सिर्फ इनकम टैक्स रिटर्न भरना किसी पब्लिक ट्रस्ट को पूरी तरह कानूनी सुरक्षा नहीं देता!

महाराष्ट्र में ट्रस्ट को आयकर कानून के साथ Bombay Public Trusts Act, 1950 का पालन भी करना होता है। महा चैरिटी पोर्टल पर वार्षिक लेखे और ऑडिट रिपोर्ट जमा करें। ट्रस्ट की संपत्ति बेचने या लंबे समय की लीज पर देने से पहले चैरिटी कमिश्नर की अनुमति अवश्य लें।

एक छोटी-सी अनुपालन चूक ट्रस्टी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और कार्रवाई का कारण बन सकती है। अपने ट्रस्ट का अनुपालन आज ही जाँचें और विशेषज्ञ की सलाह लें।



महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट, Bombay Public Trusts Act 1950, महा चैरिटी पोर्टल, ट्रस्ट ऑडिट रिपोर्ट, चैरिटी कमिश्नर अनुमति

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