24/10/2023
✨यह_भी_नहीं_रहने_वाला✨
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🔹*एक साधु देश में यात्रा केलिए पैदल निकला । रात हो जाने पर एक गाँव में आनंद नाम के व्यक्ति के दरवाजे पर रुका ।आनंद ने फकीर की खूब सेवा की । दूसरे आनंदने बहुत सारे उपहार देकर विदा किया । फकीर ने आनंद के लिए पाथॅना की - "भगवान करे तू दिनों दिन बढ़ता ही रहे ।"*
*फकीर की बात सुनकर आनंद हँस पड़ा और बोला - "अरे, फकीर ! जो है यह भी नहीं रहने वाला ।" फकीर आनंदकी ओर देखता रह गया और वहाँ से चला गया ।*
*दो वर्ष बाद फकीर फिर आनंद के घर गया और देखा कि सारा वैभव समाप्त हो गया है । पता चला कि आनंद अब बगल के गाँव में एक जमींदार के यहाँ नौकरी करता है । फकीर आनंद से मिलने गया । आनंदने अभाव में भी फकीर का स्वागत किया । झोंपड़ी में फटी चटाई पर बिठाया । खाने के लिए सूखी रोटी दी । दूसरे दिन जाते समय फकीर की आँखों में आँसू थे । फकीर कहने लगा - "हे भगवान् ! ये तूने क्या किया ?"*
*आनंद पुन: हँस पड़ा और बोला - "फकीर तू क्यों दु:खी हो रहा है ? महापुरुषों ने कहा है कि भगवान् इन्सान को जिस हाल में रखे, इन्सान को उसका धन्यवाद करके खुश रहना चाहिए । समय सदा बदलता रहता है और सुनो ! यह भी नहीं रहने वाला ।"*
*फकीर सोचने लगा - "मैं तो केवल भेष से फकीर हूँ । सच्चा फकीर तो तू ही है, आनंद।"*
*दो वर्ष बाद फकीर फिर यात्रा पर निकला और आनंद से मिला तो देखकर हैरान रह गया कि आनंद तो अब जमींदारों का जमींदार बन गया है । मालूम हुआ कि जिस जमींदार के यहाँ आनंद नौकरी करता था वह सन्तान विहीन था, मरते समय अपनी सारी जायदाद आनंद को दे गया । फकीर ने आनंद से कहा - "अच्छा हुआ, वो जमाना गुजर गया । भगवान् करे अब तू ऐसा ही बना रहे ।"*
*यह सुनकर आनंद फिर हँस पड़ा और कहने लगा - "फकीर ! अभी भी तेरी नादानी बनी हुई है ।"*
*फकीर ने पूछा - "क्या यह भी नहीं रहने वाला ?"*
*आनंद उत्तर दिया - "हाँ, या तो यह चला जाएगा या फिर इसको अपना मानने वाला ही चला जाएगा । कुछ भी रहने वाला नहीं है और अगर शाश्वत कुछ है तो वह है परमात्मा और उस परमात्मा का अंश आत्मा ।" आनंद की बात को फकीर ने गौर से सुना और चला गया ।*
*फकीर करीब डेढ़ साल बाद फिर लौटता है तो देखता है कि आनंद का महल तो है किन्तू कबूतर उसमें गुटरगूं कर रहे हैं, और आनंद का देहांत हो गया है। बेटियाँ अपने-अपने घर चली गयीं, बूढ़ी पत्नी कोने में पड़ी है ।*
*कह रहा है आसमां यह समा कुछ भी नहीं।*
*रो रही हैं शबनमें, नौरंगे जहाँ कुछ भी नहीं।*
*जिनके महलों में हजारों रंग के जलते थे फानूस।*
*झाड़ उनके कब्र पर, बाकी निशां कुछ भी नहीं।*
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*फकीर कहता है - "अरे इन्सान ! तू किस बात का अभिमान करता है ? क्यों इतराता है ? यहाँ कुछ भी टिकने वाला नहीं है, दु:ख या सुख कुछ भी सदा नहीं रहता । तू सोचता है, पडोसी मुसीबत में है और मैं मौज में हूँ । लेकिन सुन, न मौज रहेगी और न ही मुसीबत । सदा तो उसको जानने वाला ही रहेगा । सच्चे इन्सान वे हैं, जो हर हाल में खुश रहते हैं । मिल गया माल तो उस माल में खुश रहते है और हो गये बेहाल तो उस हाल में खुश रहते हैं ।"*
*फकीर कहने लगा - "धन्य है, आनंद ! तेरा सत्संग और धन्य है तुम्हारे सद्गुरु ! मैं तो झूठा फकीर हूँ, असली फकीरी तो तेरी जिन्दगी है । अब मैं तेरी तसवीर देखना चाहता हूँ, कुछ फूल चढ़ाकर दुआ तो मांग लूं ।"*
*फकीर दुसरे कमरे मे जाता है तो देखता है कि आनंद ने अपनी तस्वीर पर लिखवा रखा है - "आखिर में यह भी नहीं रहेगा*
*अभिमान रावण का भी नही रहा, हम और आप क्या चीज है।*
*आज अभिमान उन्नमूलन दिवस ( विजय दशमी) पर सब अपने अभिमान का नाश करे।*
*इसी कामना के साथ आप सभी को विजय दशमी की हार्दिक शुभकामना।*
🙏🙏
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संकलन कर्ता-
*मनोज कुमार गुप्ता CFP 9058065225*
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जीवन की अनमोल निधि 11
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14/09/2023
*💐It's my *Pleasure(मेरा सौभाग्य)💐*
बहुत दिनो से *Pleasure* गाडी का उपयोग नही होने से, वह पडी पडी खराब होने जैसी स्थिति में पहुंच रही थी।
विचार आया Olx पे बेच दे,Add डाला किमत *Rs 30000/-*
बहुत आफर आये 15 से 28 हजार तक।
मुझे लगा यदि 28 मिल रहे तो, कोई 29-30 देगा भी।एक का 29 का प्रस्ताव आया। उसे भी waiting में रखा।
एक सुबह काल आया, उसने कहा साहब नमस्कार , आपकी गाडी का add देखा। पसंद भी आयी है। परंतु 30 जमाने का बहुत प्रयत्न किया, 24 ही इकठ्ठा कर पाया हूँ। बेटा इंजिनियरिंग के अंतिम वर्ष में है। बहुत मेहनत किया है उसने। कभी पैदल, कभी सायकल, कभी बस, कभी किसी के साथ। सोचा अंतिम वर्ष तो वह अपनी गाडी से ही जाये। आप कृपया Pleasure मुझे ही दिजीएगा। नयी गाडी दुगनी किमत से भी ज्यादा है। मेरी हैसियत से बहुत ज्यादा है। थोडा समय दिजीए। मै पैसो का इंतजाम करता हूँ। मोबाइल बेच कर कुछ रुपये मिलेंगें। परंतु हाथ जोड़कर कर निवेदन है साहब, Pleasure मुझे ही दिजीएगा।
मैने औपचारिकता में मात्र Ok बोलकर फोन रख दिया। कुछ विचार मन में आये। वापस काल बैक किया और कहा -आप अपना मोबाइल मत बेचिए, कल सुबह केवल 24 हजार लेकर आईए,गाडी आप ही ले जाईए वह भी मात्र 24 में ही,,मेरे पास 29 का प्रस्ताव होने पर भी 24 में किसी अपरिचित व्यक्ति को मै *Pleasure* देने जा रहा था।
सोचा उस परिवार में आज कितने Pleasure या आनंद का निर्माण हुआ होगा।
कल उनके घर *Pleasure* आएगी।
और मुझे ज्यादा नुकसान भी नहीं हो रहा था।ईश्वर ने बहुत दिया है और सबसे बडा धन समाधान है जो कूट-कूटकर दिया है।
अगली सुबह उसने कम से कम 6-7 बार फोन किया ,साहब कितने बजे आऊ, आपका समय तो नही खराब होगा।पक्का लेने आऊं, बेटे को लेकर या अकेले आऊ। पर साहब Pleasure गाडी किसी को और नही दिजीएगा।
वह 2000,500,200,100,50 के नोटों का संग्रह लेकर आया, साथ में बेटा भी था। ऐसा लगा, पता नही कहा कहा से निकाल कर या मांग कर या इकठ्ठा कर यह पैसे लाया है।
एकदम आतुरता और कृतज्ञता से *Pleasure* को देख रहा था। मैने उसे दोनो चाबियां दी, कागज दिये। बेटा गाडी पर विनम्रतापूर्वक हाथ फेर रहा था। रुमाल निकास कर पोछ रहा था।
उसनें पैसे गिनने कहा, मैने कहा आप गिनकर ही लाये है, कोई दिक्कत नहीं।
जब जाने लगे, तो मैने उन्हे 500 का एक नोट वापस करते कहाँ, *घर जाते मिठाई लेते जाएगा*। सोच यह थी कि कही तेल के पैसे है या नही। और यदि है तो मिठाई और तेल दोनो इसमें आ जायेंगें।
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आँखों में कृतज्ञता के आंसु लिये उसने हमसे विदा ली और अपनी *Pleasure* ले गया। जाते समय बहुत ही आतुरता और विनम्रता से झुककर अभिवादन किया। बार बार आभार व्यक्त किया।
हम लोग सहज भाव में कहते है *it's my pleasure* परंतु आज Pleasure बेचते समय ही पता चला कि वास्तव में Pleasure होता क्या है।
जीवन में कुछ व्यवहार करते समय नफा नुकसान नहीं देखना चाहिए।
अपने माध्यम से किसी को क्या सचमें कुछ आनंद प्राप्त हुआ यह देखना भी होता है।
करबद्ध निवेदन है कि ईश्वर ने आपको कुछ देने लायक बनाया हो या नही,
किसी एक व्यक्ति को सुख देने या खुशी देने लायक तो बनाया ही है।
आज सब्जी वाली किसी बुजुर्ग महिला या पुरुष को अपनी ओर से केवल 5 या 10 रुपये अधिक देकर देखिएगा,
वही *Pleasure* न आये तो कहना।
🙏🙏
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संकलन कर्ता-
*मनोज कुमार गुप्ता CFP 9058065225*
*First Certified Financial Planner at Aligarh-202001*
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*हमारा आदर्श : सत्यम्-सरलम्-स्पष्टम्*
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जीवन की अनमोल निधि 10
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29/08/2023
*Journey of Indian Stock Market*
*1979* - Sensex = *100*,
*1983* - Indian Cricket Team winning World Cup. Sensex = *212*,
*1984* - *Indira Gandhi* shot dead & Bhopal Gas tragedy. Sensex = *245*,
*1989* - *Hung Parliament* with Congress outside support. Sensex = *714*,
*1991* - *Rajiv Gandhi* assassination. Sensex = *1168*,
*1993* - Blast in Mumbai. Also at BSE buidling. *Riots all over*. Sensex = *2281*
2001- Gujarat *earthquake*. Sensex = *3640*,
2004- UPA coming to power with Left party support. Sensex = *5591*,
*2006* - Sensex conquering = *10000*,
*2007* - Sensex conquering = *20000*,
*2008* - subprime crisis
Crude oil rising upto $ 147.
Sensex below 9000
*2010* - Satyam *scam*, Common wealth scam. Sensex = *17590*,
*2013- Fed taper tantrums
*2014* - *BJP* alone conquering *283 seats* in Lok Sabha and NDA coming to power with 330 seats. Sensex = *25000*.
*04/03/2015* - Sensex = Life Time *High* *30025*..!
2016- Demonitisation
2018- carnage in small caps
2020- Covid. Sensex back at 25900 on 23 march
2022-2023 Russia Ukraine war , 525 bps rate hikes by fed
Sensex at 65000…. 650 times
Downturns are temporary
India story is structural 👍
Be disciplined ..
*Happy Investing*
*मनोज कुमार गुप्ता CFP 9058065225*
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28/08/2023
🌹🌹दान की महिमा🌹🌹
एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने कुछ दे रखा है।
पूर्णिमा का दिन था। भिखारी सोच रहा था कि आज अगर ईश्वर की कृपा होगी तो मेरी यह झोली शाम से पहले ही भर जाएगी। अचानक सामने से राजपथ पर उसी देश के राजा की सवारी आती हुई दिखाई दी।
भिखारी खुश हो गया। उसने सोचा कि राजा के दर्शन और उनसे मिलने वाले दान से आज तो उसकी सारी दरिद्रता दूर हो जाएंगी और उसका जीवन संवर जाएगा। जैसे-जैसे राजा की सवारी निकट आती गई, भिखारी की कल्पना और उत्तेजना भी बढ़ती गई। जैसे ही राजा का रथ भिखारी के निकट आया, राजा ने अपना रथ रूकवाया और उतर कर उसके निकट पहुंचे।
भिखारी की तो मानो सांसें ही रूकने लगीं, लेकिन राजा ने उसे कुछ देने के बदले उल्टे अपनी बहुमूल्य चादर उसके सामने फैला दी और उससे भीख की याचना करने लगा। भिखारी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। अभी वह सोच ही रहा था कि राजा ने पुनः याचना की। भिखारी ने अपनी झोली में हाथ डाला मगर हमेशा दूसरों से लेने वाला मन देने को राजी नहीं हो रहा था।
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जैसे-तैसे करके उसने दो दाने जौ के निकाले और राजा की चादर में डाल दिए। उस दिन हालांकि भिखारी को अधिक भीख मिली, लेकिन अपनी झोली में से दो दाने जौ के देने का मलाल उसे सारा दिन रहा। शाम को जब उसने अपनी झोली पलटी तो उसके आश्चर्य की सीमा न रही।
जो जौ वह अपने साथ झोली में ले गया था, उसके दो दाने सोने के हो गए थे। अब उसे समझ में आया कि यह दान की महिमा के कारण ही हुआ। वह पछताया कि - काश! उस समय उसने राजा को और अधिक जौ दिए होते लेकिन दे नहीं सका, क्योंकि उसकी देने की आदत जो नहीं थी।
शिक्षा👇
१. देने से कोई चीज कभी घटती नहीं।
२. लेने वाले से देने वाला बड़ा होता है।
३. अंधेरे में छाया बुढ़ापे में काया और अन्त समय में माया किसी का साथ नहीं देते हैं।
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जीवन की अनमोल निधि 9
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23/08/2023
!! प्रेम का स्पर्श !!*
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टालस्टाय एक दिन सुबह एक गांव की सड़क से निकला। एक भिखारी ने हाथ फैलाया। टालस्टाय ने अपनी जेब तलाशी लेकिन जेब खाली थे। वह सुबह घूमने निकला था और पैसे नहीं थे।
उसने भिखारी को कहा, मित्र ! क्षमा करो, मेरे पास पैसे नहीं हैं, तुम जरूर दुख मानोगे। लेकिन मैं मजबूरी में पड़ गया हूं, पैसे मेरे पास नहीं हैं। उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, मित्र! क्षमा करो, पैसे मेरे पास नहीं हैं। उस भिखारी ने कहा कोई बात नहीं। तुमने मित्र कहा, मुझे बहुत कुछ मिल गया। यू काल्ड मी ब्रदर, तुमने मुझे बंधु कहा ! और बहुत लोगों ने मुझे अब तक पैसे दिए थे लेकिन तुमने जो दिया है, वह किसी ने भी नहीं दिया था। मैं बहुत अनुगृहीत हूं।
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एक शब्द प्रेम का– मित्र, उस भिखारी के हृदय में क्या निर्मित कर गया, क्या बन गया। टालस्टाय सोचने लगा। उस भिखारी का चेहरा बदल गया, वह दूसरा आदमी मालूम पडा। यह पहला मौका था कि किसी ने उससे कहा था, मित्र। भिखारी को कौन मित्र कहता है? इस प्रेम के एक शब्द ने उसके भीतर एक क्रांति कर दी, वह दूसरा आदमी है। उसकी हैसियत बदल गयी, उसकी गरिमा बदल गयी, उसका व्यक्तित्व बदल गया। वह दूसरी जगह खड़ा हो गया। वह पद-चलित एक भिखारी नहीं है, वह भी एक मनुष्य है। उसके भीतर एक नया क्रिएशन शुरू हो गया। प्रेम के एक छाेटे से शब्द ने उसे उसके अस्तित्व का बोध करा दिया...
प्रेम का जीवन ही क्रिएटिव जीवन है। प्रेम का जीवन ही सृजनात्मक जीवन है। प्रेम का हाथ जहां भी छू देता है, वहां क्रांति हो जाती है, वहां मिट्टी सोना हो जाती है। प्रेम का हाथ जहां स्पर्श देता है, वहां अमृत की वर्षा शुरू हो जाती है।
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22/08/2023
!! *दो शब्द* !!
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बहुत समय पहले की बात है, एक प्रसिद्द गुरु अपने मठ में शिक्षा दिया करते थे। पर यहाँ शिक्षा देना का तरीका कुछ अलग था, गुरु का मानना था कि सच्चा ज्ञान मौन रह कर ही आ सकता है; और इसलिए मठ में मौन रहने का नियम था। लेकिन इस नियम का भी एक अपवाद था, दस साल पूरा होने पर कोई शिष्य गुरु से दो शब्द बोल सकता था।
पहला दस साल बिताने के बाद एक शिष्य गुरु के पास पहुंचा, गुरु जानते थे की आज उसके दस साल पूरे हो गए हैं ; उन्होंने शिष्य को दो उँगलियाँ दिखाकर अपने दो शब्द बोलने का इशारा किया। शिष्य बोला, ”खाना गन्दा“ गुरु ने ‘हाँ’ में सर हिला दिया। इसी तरह दस साल और बीत गए और एक बार फिर वो शिष्य गुरु के समक्ष अपने दो शब्द कहने पहुंचा। ”बिस्तर कठोर”, शिष्य बोला।
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गुरु ने एक बार फिर ‘हाँ’ में सर हिला दिया। करते-करते दस और साल बीत गए और इस बार वो शिष्य गुरु से मठ छोड़ कर जाने की आज्ञा लेने के लिए उपस्थित हुआ और बोला, “नहीं होगा” . “जानता था”, गुरु बोले, और उसे जाने की आज्ञा दे दी और मन ही मन सोचा जो थोड़ा सा मौका मिलने पर भी शिकायत करता है वो ज्ञान कहाँ से प्राप्त कर सकता है।
*शिक्षा*:-
फ्रेंड्स! बहुत से लोग अपनी लाइफ कम्प्लेन करने या शिकायत करने में ही बीता देते हैं, और उस शिष्य की तरह अपने लक्ष्य से चूक जाते हैं। शिष्य ने पहले दस साल सिर्फ ये बताने के लिए इंतज़ार लिया कि खाना गन्दा है ; यदि वो चाहता तो इस समय में वो खुद खाना बनाना सीख कर अपने और बाकी लोगों के लिए अच्छा खाना बना सकता था, चीजों को बदल सकता था… हमें यही करना चाहिए; हमें शिाकयात करने की जगह चीजों को सही करने की दिशा में काम करना चाहिए। और कम्प्लेन करने की जगह, “हमें खुद वो बदलाव बनना चाहिए जो हम दुनिया में देखना चाहते हैं।
🙏🙏
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21/08/2023
*💐💐स्त्री-सर्वदुखहर्ता*💐💐
एक पति-पत्नी में तकरार हो गयी, पति कह रहा था : "मैं नवाब हूँ इस शहर का लोग इसलिए मेरी इज्जत करते है और तुम्हारी इज्जत मेरी वजह से है।"
पत्नी कह रही थी : "आपकी इज्जत मेरी वजह से है। मैं चाहूँ तो आपकी इज्जत एक मिनट में बिगाड़ भी सकती हूँ और बना भी सकती हूँ।"
नवाब को तैश आ गया और बोला-"ठीक है दिखाओ
मेरी इज्जत खराब करके..!!!"
बात आई गई हो गयी। नवाब के घर शाम को महफ़िल जमी थी दोस्तों की... हंसी मजाक हो रहा था कि अचानक नवाब को
अपने बेटे के रोने की आवाज आई, वो जोर जोर से रो
रहा था और नवाब की पत्नी
बुरी तरह उसे डांट रही थी। नवाब ने जोर से आवाज देकर पूछा कि क्या हुआ बेगम क्यों डाँट रही हो..??
बेगम ने अंदर से कहा., "देखिये न---आपका बेटा खिचड़ी मांग रहा है और जबकि उसका पेट
भी भर चुका है..!!"
नवाब ने कहा.., "दे दो थोड़ी सी
और..!!"
बेगम बोली., "घर में और भी तो लोग है सारी इसी को कैसे दे दूँ..??"
पूरी महफ़िल शांत हो गयी । लोग कानाफूसी करने लगे कि कैसा नवाब है ? जरा सी खिचड़ी के लिए इसके घर में झगड़ा होता है। नवाब की पगड़ी उछल गई। सभी लोग चुपचाप उठ कर चले गए।
नवाब उठ कर अपनी बेगम के पास आया और बोला.,"मैं मान गया, तुमने आज मेरी इज्जत तो उतार दी, लोग भी कैसी-
कैसी बातें कर रहे थे। अब तुम यही इज्जत वापस लाकर दिखाओ..!!"
बेगम बोली.., "इसमे कौन सी
बड़ी बात है आज जो लोग महफ़िल में थे उन्हें आप फिर किसी बहाने से उन्हें निमंत्रण
दीजिये..!!"
नवाब ने फिर से सबको बुलाया बैठक और मौज मस्ती के बहाने., सभी मित्रगण बैठे थे, हंसी मजाक चल रहा था कि फिर वही नवाब के बेटे
की रोने की आवाज आई
नवाब ने आवाज देकर पूछा.,
"बेगम क्या हुआ क्यों रो रहा है हमारा बेटा ?"
बेगम ने कहा., "फिर वही खिचड़ी खाने की जिद्द कर रहा है..!!"
लोग फिर एक दूसरे का मुंह देखने लगे कि यार एक मामूली खिचड़ी के लिए इस नवाब के घर पर रोज झगड़ा होता है।
नवाब मुस्कुराते हुए बोला., "अच्छा बेगम तुम एक काम करो तुम खिचड़ी यहाँ लेकर आओ .. हम खुद अपने हाथों से अपने बेटे को देंगे., वो मान जाएगा और सभी मेहमानो को भी खिचड़ी खिलाओ..!!"
बेगम ने जवाब दिया.., "जी नवाब साहब...!!" बेगम बैठक खाने में आ गई पीछे नौकर खाने का सामान सर पर रख आ रहा था, हंडिया नीचे रखी और मेहमानो को भी देना शुरू किया
अपने बेटे के साथ।
सारे नवाब के दोस्त हैरान -जो परोसा जा रहा था वो चावल की खिचड़ी तो कत्तई नहीं थी। उसमे खजूर-पिस्ता-काजू बादाम-किशमिश गिरी इत्यादि से मिला कर बनाया हुआ
सुस्वादिष्ट व्यंजन था।
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अब लोग मन ही मन सोच
रहे थे कि ये खिचड़ी है? नवाब के घर इसे खिचड़ी बोलते हैं तो -मावा-मिठाई किसे बोलतेहोंगे ?
नवाब की इज्जत को चार-चाँद लग गए । लोग नवाब की रईसी की बातें करने लगे।
नवाब ने बेगम के सामने हव---और जिस व्यक्ति को घर में इज्जत हासिल नहीं उसे दुनियाँ मे कहीं इज्जत नहीं मिलती..!!!"*
*सृष्टि मे यह सिद्धांत हर जगह लागू हो जाएगा । अहंकार युक्त जीवन में स्त्री जब चाहे हमारे अहंकार की इज्जत उतार सकती है और नम्रता युक्त जीवन मे इज्ज़त बना सकती है....!!!!!*
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20/08/2023
*ईमानदारी सर्वोपरि है*
रोहित नाम का एक व्यक्ति था, जो स्वभाव का बहुत ही गंभीर था। समय के साथ उसकी पढाई भी पूरी हो चुकी थी लेकिन पढ़े-लिखे होते हुए भी उसके पास कोई नौकरी नहीं थी। इस कारण वह दिन-रात काम की तलाश में इधर–उधर भटकता रहता था। रोहित ईमानदार व्यक्ति था इसलिये भी उसे काम मिलने में मुश्किल आ रही थी। दिन पर दिन बीते जा रहे थे, जीवन-यापन के लिए उसे मजदूरी करनी पड़ी क्योंकि रोजी रोटी के लिए उसके पास अभी कोई दूसरा विकल्प नहीं था। रोहित के व्यवहार से यह साफ दिखता था कि वह एक पढ़ा-लिखा इंसान है।
एक दिन रोहित सेठ के घर का काम कर रहा था। सेठ का पूरा ध्यान रोहित पर ही रहता था। धीरे-धीरे सेठ को समझ में आने लगा कि रोहित एक पढ़ा-लिखा होशियार लड़का है लेकिन हालात से मजबूर होकर उसे मजदूरी का काम करना पड़ रहा है। सेठ को अपने जरूरी कामों के लिए एक ईमानदार व्यक्ति की जरुरत भी थी इसलिए सेठ ने रोहित की परीक्षा लेने की सोची।
सेठ ने एक दिन रोहित को बुलाकर उसे पचास हजार रूपये दिए जिसमे सभी नोट सो-सो के थे और कहा भाई तुम मुझे ईमानदार लगते हो ये पैसे मेरे एक व्यापारी दोस्त को दे आओ। रोहित ने सेठ के विश्वास का मान रखा और ईमानदारी से पैसे पहुँचा आया।
दूसरे दिन सेठ ने रोहित को बिना गिने पैसे दिए और कहा स्वयं गिनकर मेरे व्यापारी मित्र को दे आओ। रोहित ने अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ किया। सेठ पहले से ही पैसे गिनकर रखता था पर वो तो रोहित कि ईमानदारी देखना चाहता था। इस तरह कई दिनों तक सेठ रोज उसे पैसे देने के लिए भेजता रहा।
रोहित की आर्थिक हालत बहुत ही ख़राब थी। लेकिन एक दिन उसकी नियत खराब हो गयी और उसने सो रूपये चुरा लिए। जिसका पता सेठ को लग चुका था, पर सेठ ने उसे कुछ नहीं कहा। सेठ ने फिर से रोहित को रूपये देने भेजा। सेठ के कुछ न कहने के कारण रोहित की हिम्मत और बढ़ गयी। इस तरह उसने रोजाना चोरी शुरू कर दी। रोहित को यह लगने लगा कि यह तरीका बहुत ही आसान है आर्थिक स्थिति को सुधारने का।
सेठ को रोहित से पूरी उम्मीद थी कि रोहित उसे एक दिन सच जरूर बोलेगा, लेकिन रोहित ने सच का साथ नहीं दिया। फिर एक दिन सेठ ने रोहित को काम से निकाल दिया। वास्तव में सेठ तो अपने जीवन के लिए एक ईमानदार सहारा ढूंढ रहा था क्योंकि सेठ के कोई संतान नहीं थी। रोहित का व्यवहार सेठ को अच्छा लगने लगा और उसे भोला-भाला जानकर सेठ ने उसकी परीक्षा लेने की सोची थी। अगर रोहित सच का साथ देता तो सेठ उसे अपनी दुकान की जिम्मेदारी सौप देता।
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जब रोहित को सेठ की मंशा का पता चला तो उसे बहुत दुःख हुआ और उसने स्वीकार किया चाहे जैसी भी परिस्थती हो ईमानदारी सदैव सर्वोपरि है और यह सर्वोच्च नीति भी है।
दोस्तों, जीवन में चाहे कैसा भी मुकाम आये, लेकिन कभी भी ईमानदारी के साथ कोई भी समझोता ना करें। क्योंकि ईमानदारी जीवन की वो पूंजी हैं जो आज के दौर में मुश्किल जरूर हैं लेकिन कभी गलत परिणाम नहीं देती। जीवन के उतार-चढ़ाव तो कुछ दिन के होते है, इस कारण अपनी नीतियों की पकड़ मजबूत रखे। आपका सच्चा समर्पण ही आपके सच्चाई की ताकत है। आप भी आज से ठान लीजिए चाहे जैसी भी परिस्थती हो ईमानदारी का दामन कभी नही छोड़ेंगे।
🙏🙏
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संकलन कर्ता-
*मनोज कुमार गुप्ता CFP 9058065225*
*First Certified Financial Planner at Aligarh-202001*
*Creative Wealth & Health Consultant*
*AMFI Register Mutual Fund Distributor*
*हमारा आदर्श : सत्यम्-सरलम्-स्पष्टम्*
http://creativewealthplanner.com
जीवन की अनमोल निधि 9
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19/08/2023
🌹🌹घास और बाँस🌹🌹
ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो एक व्यापारी था लेकिन उसका व्यापार डूब गया और वो पूरी तरह निराश हो गया। अपनी जिंदगी से बुरी तरह थक चुका था। अपनी जिंदगी से तंग आ चुका था।
एक दिन परेशान होकर वो जंगल में गया और जंगल में काफी देर अकेले बैठा रहा। कुछ सोचकर भगवान से बोला – मैं हार चुका हूँ, मुझे कोई एक वजह बताइये कि मैं क्यों ना हताश होऊं, मेरा सब कुछ खत्म हो चुका है।
मैं क्यों ना व्यथित होऊं?"
भगवान मेरी सहायता किजिए"
भगवान का जवाब :
तुम जंगल में इस घास और बांस के पेड़ को देखो- जब मैंने घास और इस बांस के बीज को लगाया। मैंने इन दोनों की ही बहुत अच्छे से देखभाल की। इनको बराबर पानी दिया, बराबर रोशनी दी।
घास बहुत जल्दी बड़ी होने लगी और इसने धरती को हरा भरा कर दिया लेकिन बांस का बीज बड़ा नहीं हुआ। लेकिन मैंने बांस के लिए अपनी हिम्मत नहीं हारी।
दूसरी साल, घास और घनी हो गयी उसपर झाड़ियाँ भी आने लगी लेकिन बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई। लेकिन मैंने फिर भी बांस के बीज के लिए हिम्मत नहीं हारी।
तीसरी साल भी बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई, लेकिन मित्र मैंने फिर भी हिम्मत नहीं हारी।
चौथे साल भी बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई लेकिन मैं फिर भी लगा रहा।
पांच साल बाद, उस बांस के बीज से एक छोटा सा पौधा अंकुरित हुआ……….. घास की तुलना में ये बहुत छोटा था और कमजोर था लेकिन केवल 6 महीने बाद ये छोटा सा पौधा 100 फ़ीट लम्बा हो गया। मैंने इस बांस की जड़ को वृद्धि करने के लिए पांच साल का समय लगाया। इन पांच सालों में इसकी जड़ इतनी मजबूत हो गयी कि 100 फिट से ऊँचे बांस को संभाल सके।
जब भी तुम्हें जिंदगी में संघर्ष करना पड़े तो समझिए कि आपकी जड़ मजबूत हो रही है। आपका संघर्ष आपको मजबूत बना रहा है जिससे कि आप आने वाले कल को सबसे बेहतरीन बना सको।
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मैंने बांस पर हार नहीं मानी, मैं तुम पर भी हार नहीं मानूंगा, किसी दूसरे से अपनी तुलना मत करो घास और बांस दोनों के बड़े होने का time अलग अलग है दोनों का उद्देश्य अलग अलग है।
तुम्हारा भी समय आएगा। तुम भी एक दिन बांस के पेड़ की तरह आसमान छुओगे। मैंने हिम्मत नहीं हारी, तुम भी मत हारो !अपनी जिंदगी में संघर्ष से मत घबराओ, यही संघर्ष हमारी सफलता की जड़ों को मजबूत करेगा।
तो लगे रहिये, आज नहीं तो कल आपका भी दिन आएगा।
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